भुजंगासन का क्या है और इसे करने के फायदे (Bhujangasana Benefits in Hindi)

May 15, 2021 by Aryan

योग और आयुर्वेद, सिर्फ मनुष्य को स्वस्थ करने के लिए ही नहीं हैं। ये असल में हमें जीवन जीने का तरीका बताते हैं और हमें भीतर से स्वस्थ बनाते हैं।प्रकृति में उगने वाली जड़ी-बूटियों से खुद को स्वस्थ बनाने के लिए मानव ने आयुर्वेद का निर्माण किया। जबकि विभिन्न पशु-पक्षियों की मुद्राओं से सीखकर मनुष्य ने योग विद्या की रचना की है।

आज योग न सिर्फ भारतियों की बल्कि विदेशियों  की भी पहली पसंद योग बन चुका है योग  और प्राणायाम पर हुए शोध में इसके बहुत सारे शारीरिक और मानसिक लाभ  बताये हैं आज आप एक महत्वपूर्ण आसन भुजंगासन (Bhujangasana Benefits in Hindi) के बारे में  सभी बाते जानेगे कि…

  • भुजंगासन का क्या है
  • भुजंगासन कैसे करे?
  • भुजंगासन करने के फायदे (Bhujangasana Benefits in Hindi)
  • भुजंगासन कब नहीं करना चाहिए?

तो आइये जानते हैं भुजंगासन के बारे में, जिसके नियमित अभ्यास से हमें ढेरों फायदे मिलते हैं। भुजंगासन (Cobra Pose) एक बेहतरीन आसन है ये कमर की चर्बी कम करने में मदद करता है यही आप वजन कम करने के लिहाज से योग कर रहे है तो ये आसन  आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है इसीलिए इस आर्टिकल में आप भुजंगासन का क्या है और इसे करने के फायदे (Bhujangasana Benefits in Hindi) से जुड़ी हर उस चीज के बारे में जानेगें।

Table of Contents

भुजंगासन का अर्थ क्या है? (What is Bhujangasana in Hindi)

भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से 8वां है। भुजंगासन को सर्पासनकोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है। ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है। जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है।

भुजंगासन करने से पहले जाने ये एहम बातें-

भुजंगासन का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए। भोजन, आसन करने के वक्त से कम से कम 4-6 घंटे पहले किया जाना चाहिए। इससे हमारे पेट में गए भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। पचे हुए भोजन से मिलने वाली ऊर्जा से आपको आसन करने में आसानी होगी।

भुजंगासन के अभ्यास का सबसे सही समय सुबह का होता है। लेकिन अगर किसी कारणवश आप सुबह इस आसन को नहीं कर पाते हैं तो आप इस आसन का अभ्यास शाम को भी कर सकते हैं।

भुजंगासन कैसे करें? (Bhujangasana Benefits in Hindi)

1. पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें। ध्यान रखें कि आपके टखने एक-दूसरे को छूते रहें।

2. इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और दोनों हथेलियों को फर्श की तरफ करें।

3. अब अपने शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचें और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचें।

4. इसके बाद अपने सिर को पीछे की तरफ खीचें और साथ ही अपनी छाती को भी आगे की तरफ निकालें। सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें। लेकिन ध्यान दें कि आपके कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें।

5. इसके बाद अपने हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बढ़ाएं।

6. शरीर को इस स्थिति में करीब 15 से 30 सेकेंड तक रखें और सांस की गति सामान्य बनाए रखें। ऐसा महसूस करें कि आपका पेट फर्श की तरफ दब रहा है। लगातार अभ्यास के बाद आप इस आसन को 2 मिनट तक भी कर सकते हैं।

7. इस मुद्रा को छोड़ने के लिए, धीरे-धीरे अपने हाथों को वापस साइड पर लेकर आएं। अपने सिर को फर्श पर विश्राम दें। अपने हाथों को सिर के नीचे रखें। बाद में धीरे से अपने सिर को एक तरफ मोड़ लें और धीमी गति से दो मिनट तक सांस लें।

भुजंगासन के फायदे- Bhujangasana Benefits in Hindi

भुजंगासन के अभ्यास से होने वाले फायदे :

1. कोबरा पोज़ का अभ्यास करने से स्पाइन, ग्लूटियल मसल्स, आर्म्स, कंधे और जांघे मजबूत होती हैं। इसके अलावा यह फ्लैक्सिबिलिटी को बढ़ाने में मदद करता है और शारीरिक संतुलन बनाता है।

2. भुजंगासन के अभ्यास से पेट सही रहता है। यह पेट की मसल्स को स्ट्रेच करने में मदद करता है और एब्डोमिनल ऑर्गन्स को बेहतरी से काम करने के लिए उत्तेजित करता है। इस आसन के अभ्यास से गैस्ट्रोइन्टेस्टिनल फ्लुइड (gastrointestinal fluid) स्टिमुलेट होते हैं जिससे गट (gut) हेल्दी रहता है।

3. पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ ही , मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ सकती है।

4. मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिल सकती है।

5. भुजंगासन करने से कमर के दर्द को ठीक करने और इससे राहत पाने में मदद मिल सकती है। बहुत देर तक बैठे रहने और अधिक मूवमेंट ना करने के कारण होने वाले कमर और गर्दन दर्द से राहत पाने के लिए आप भुजंगासन का अभ्यास कर सकते हैं। यह कमर को स्ट्रेच करके मसल्स को खोलने में मदद करता है।

6. फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है।

7. भुजंगासन आपके मूड को बेहतर करने में भी मदद करता है। यह शारीरिक थकान को कम करता है और दिमाग को शांत करने में मदद करता है।

8. फेफड़ों और हार्ट की नसों के ब्लॉकेज खोलने में भी मदद मिल सकती, जिससे ह्रदय सम्बंधी समस्याएं दूर होती है।

9. भुजंगासन का अभ्यास अस्थमा के रोगियों के लिए लाभकारी होता है। इस आसन की प्रैक्टिस करते वक्त जब हम सिर ऊपर की ओर उठाते हैं तो सीने को भी ऊपर की ओर खींचना होता है जिससे कंजेशन को कम करने और फेफड़ों को फैलाने में मदद मिलती है,और शरीर में आक्सीजन लेवल भी सामान्य बना रहेता है  इससे अस्थमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

भुजंगासन कब नहीं करना चाहिए?

यदि आपको इनमें से कोई समस्या नही है तभी आपको भुजंगासन करना चाहिए

  • पीठ में कोई चोट हो तो न करें भुजंगासन
  • हर्नियाँ की सिकायत होने पर न करें भुजंगासन
  • सर में दर्द होने पर न करें भुजंगासन
  • गर्भावस्था के समय न करें भुजंगासन
  • घुटने और कलाई में दर्द होने पर न करें भुजंगासन

हमे उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल Bhujangasana Benefits in Hindi पसंद आया होगा और भुजंगासन से सम्बंधित आपको सभी बाते अच्छे से समझ आगई होंगी, यदि अभी भी आपके मन में इससे सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमे comment के माध्यम से साझा कर सकते है

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