Top 7 Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi

लगातार बदलती जीवन शैली और दिनचर्या के करण ह्मरी इम्युनिटी कमजोर होती जा रही है जिससे वायरस (बीमारियाँ) बहुत ही आसानी से हमको प्रभावित करती है इन बिमारियों को दूर रखे  के लिए न सिर्फ अपनी दिनचर्या बदलने की जरूरत है बल्कि उसके साथ ही उसमे योग को शामिल करना बेहद ही जरुरी है रोजाना  योग करने से न सिर्फ जीवन में अनुशासन आता है बल्कि (Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi)

योग न सिर्फ लोगों की रचनात्मकता के साथ ऊर्जा बढ़ाने के काम आता है, बल्कि तनाव को कम करने, एकाग्रहता बढ़ाने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत भी करता है।

कोरोना वायरस के इस दौर में जब संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है और बीमार पड़ने की संभावना भी पहले से अधिक हो गई है। खासकर ऐसे समय में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। हमारे आसपास लोग छींकते और खांसते हैं, तो हमारे शरीर के लिए रोगजनकों से दुर रहना मुश्किल होता है। हम बीमार लोगों के संपर्क में आने से नहीं बच सकते हैं, ऐसे में हम अपने शारिरिक रक्षा तंत्र को मज़बूत करने के लिए निश्चित रूप से काम कर सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए हमें कई प्रकार के फूड्स का सेवन करने के साथ-साथ (Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi) का भी सहारा लेना चाहिए। खासकर बदलते हुए मौसम और मानसून के सीजन में सेहत के लिए जरा-सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

आज आप इस लेख में  उन बेहतरीन योगासन के बारे में जानेगे जिससे आप अपनी ( Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi)

Table of Contents

अनुलोम विलोम

अनुलोम विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोध प्राणायाम के नाम से जाना जाता है। अनुलोम का अर्थ सीधा और विलोम का अर्थ उल्टा होता है। इस प्राणायाम की मुख्य विशेषता यह है कि इसको दाएं और बाएं नासिका छिद्रों से क्रम बंद सांस लिया और छोड़ा जाता है। जो आपके शरीर को भीतर से ठीक करने और बाहर से मजबूत करने का काम करता है। प्राणायाम और आसन आपको मन को शांत करने, तनाव को कम करने, हार्मोन और विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।

अनुलोम विलोम करने का सही तरीका

  1. बैठते समय देखें कि आपका मेरुदंड सीधा हो सर ऊंचा तथा दोनों हथेलियां पैर पर और आंखें बंद होनी चाहिए अब गहरी सांस लेकर शरीर को तथा मन हो आराम की स्थिति में लाएं।
  2. अब अपनी बाई हथेली को ध्यान मुद्रा में रखे। अंगुठे से दाएं नाका के छिद्र पर रख कर बंद करके बाएं नाका से सांस ले फिर बाय नाका छिद्र अनामिका तथा कनिष्ठा उंगली से बंद कर दे और दाएं नाका से सांस छोड़ें अब अपनी दाएं नाका से सांस ले तथा बाय से छोड़े।
  3. यह नाड़ी शोधन या अनुलोम विलोम का यह एक चक्र है ऐसे ही पांच चक्र दोहराएं कोशिश करना चाहिए कि जितना समय सास भीतर लेते हैं उससे दुगुना समय सांस छोड़ने में लगाना चाहिए सास धीमी और स्थिर में बनाए रखने कि कोशिश करें।

अनुलोम विलोम के चमत्कार (फायदे) Anulom Vilom Benefits

जैसा इसका नाम नाड़ी शोध है जो हमारे शरीर की नस नाड़ी को शुद्ध करने में महत्वपूर्ण प्राणायाम माना जाता है । उसमें 72 करोड़ 72 लाख कुछ नाडिया मिलती है जो आपके शरीर के हर क्रिया प्रक्रिया हर ऑर्गन से जुड़ा है इसमें तीन मुख्य नाड़ी है सूर्य नाड़ी, चंद्र नाड़ी और मुद्रा नाड़ी है।

  1. इस प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य शरीर की ऊर्जा बहन करने वाली सभी नाडीयों को शुद्धिकरण करके पूरे शरीर को शुद्ध वायु और  पोषण प्रदान करना है।
  2. वात, कफ और पित्त तीनों दोषों को नियमित रूप से अनुलोम विलोम प्राणायाम के अभ्यास के साथ ठीक किया जा सकता है।
  3. इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से रक्तचाप और मधुमेह को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।( Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi)
  4. एकाग्रता, धैर्य, संकल्पशीलता, निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मकता को बढाने मे भी अनुलोम विलोम प्राणायाम बड़ा फ़ायदेमंद है।
  5. कब्ज, गैस्ट्रिक, गैस्ट्रिक समस्याओं और खर्राटों के  इलाज के साथ साथ  नियामत अभियास करने से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है।
  6. अनुलोम विलोम को लगातार करते रहने से शरीर में श्वांस सम्बंधी समस्याए दूर रहते है और शरीर में आक्सीजन के मात्रा नियंत्रित रहती है

सेतुबंध आसन

सेतुबंध आसन को ब्रिज पोज़ भी कहा जाता है क्योंकि इसका आकार बहुत हद तक ब्रिज के समान है। यह पीठ के बल पर लेट कर किए जाने वाले महत्वपूर्ण आसनों में से एक है। सेतुबंध आसन कमर दर्द, थाइरोइड, डिप्रेशन ईत्यादि के लिए बहुत कारगर है।

 सेतुबंध आसन करने का सही तरीका- Steubandhasana steps in Hindi

इस आसन को करने की विधि बहुत सरल है। यह आसन खासकर जिनको कमर दर्द की शिकायत रहती है नियमित रूप से  करने से  दर्द में आराम मिलता है साथ ही रीड की हड्डी में लचीलापन भी आता है।

  1. सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाए।
  2. अब अपने घुटनों को मोड़े ताकि यह रीढ़ की हड्डी के 90 डिग्री पर हो।
  3. सांस लेते हुए अपने कमर को सहूलियत के हिसाब से उठाए।
  4. इस अवस्था को 20-30 सेकंड तक बनाये रखें।
  5. जब आप आसन धारण करते है तो धीरे धीरे सांस ले
  6. और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  7. फिर सांस छोड़ते हुए ज़मीन पर आये।
  8. यह एक चक्र हुआ, आप 3 से 5 बार इसे कर सकते हैं।

सेतुबंध आसन के लाभ- Setu bandhasana benefits

  1. सिर दर्द व कमर दर्द के लिये उत्तम, तनाव एवं अनिद्रा दूर करने में उपयोगी।
  2. फेफड़ों को खोलता है और थाइरोइड से सम्बंधित समस्या को दूर करता है।
  3. पीठ, छाती व गर्दन में अच्छा खिंचाव पैदा करता है, साथ ही रक्त संचार को बेहतर बनाता है
  4. उच्च रक्त चाप, अस्थमा, ऑस्टियोपोरोसिस व साइनस के लिए लाभदायक सेतुबंध आसन।
  5. पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायता करता है।(Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi)

भुजंगासन

भुजंगासन को सर्पासनकोबरा आसन भी कहा जाता है। इसमें शरीर को सर्प की आकृति में मोड़ा जाता है इस आसन को करने से आपकी रीढ़ की बिगड़ी हुई आकृति को सही आकृति में लाने तक की क्षमता होती है।

भुजंगासन करने का तरीका

  1. सबसे पहले आप फर्श पर पेट के बल लेट जाये और हाथों को पैरों से सटा करके रखें।
  2. अब अपने हाथों को अपनी छाती की तरफ लायें और हथेली के बल रखें।
  3. फिर अपने सिर को उठाते हुए पीछे की ओर ले जाएँ जितना ज्यादा से ज्यादा जा सके।
  4. इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रुकें और फिर आराम से वापस आ जायें।
  5. ऐसा आप 5 से 10 बार तक कर सकते हैं।

कपालभाति

कपालभाती आसन मुख्य रूप से आपके श्वसन तंत्र और पेट को मजबूत करने का सबसे बढ़िया आसन है इसको करने से आपके फेफड़े काफी मजबूत हो जाते हैं और आपकी पेट से सम्बंधित समस्याएं आपसे कोसों दूर हो जाती हैं।

कपालभाति करने का तरीका

  1. सबसे पहले आप ध्यान की मुद्रा में बैठ जाएँ।
  2. अब आप अपने पेट को अन्दर लेते हुए सांस को अपने अन्दर भरें।
  3. फिर आराम से सांस को बाहर की तरफ छोड़े।
  4. इसे आप 5 से 10 मिनट तक करें।

ताड़ासन

ताड़ासन एक बेहतरीन स्ट्रेचिंग व्यायाम है जिसको करने से शरीर का रक्त प्रवाह बढ़ता है और इसके साथ ही आपकी इम्युनिटी बढती है ताड़ासन को करने का सबसे उपर्युक्त समय सुबह उठने के तुरंत बाद का होता है इसे Mountain Pose भी कहा जाता है।

ताड़ासन करने का तरीका

  1. सबसे पहले सावधान की स्थिति में खड़े हो जाएँ
  2. अब अपने हाथों के पंजों को आपस में फंसाकर सिर की सिधान में ले जाएँ और सांस को अन्दर भरते हुए पूरा स्ट्रेच करें
  3. अब इस स्थिति में 15 से 20 सेकेंड तक रुकें फिर सांस को छोड़ते हुए वापस पहले की मुद्रा में आ जाएँ
  4. इस प्रक्रिया को आप 15 से 20 बार करें

बालासन

बालासन को शिशुआसन के नाम से भी जानते है क्योंकि इसमें  हम एक शिशु की तरह वज्र आसन लेकर हाथों और शरीर को आगे की ओर झुकाते है। यह आसन बेहद आसान ज़रूर है मगर काफी लाभदायक भी है। कमर की मांसपेशियों को आराम देता है और ये आसन कब्ज़ को भी दूर करता है। मन को शांत करने वाला ये आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।

बालसन करने का सही तरीका-

  1. सबसे पहले आपको अपने धुटने को मोड़ कर वज्रासन में बैठ जायें
  2. अब लंबी ग़हरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर आसमान की तरफ उठाना है
  3. अब कमर से झुकते हुए अपने सर और हाँथ को जमीन पर टिका दे
  4. अब अपनी साँस को बहर की ओर छोड़े
  5. इस प्रक्रिया को 10 से 15 बार करे

बालासन करने के फायदे Balasana Benefits in Hindi

  1. बालासन से छाती, पीठ और कंधों में से तनाव ओर अकड़न पूरी तरह से दूर होने के साथ साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, कमर ओर पेट की एक्स्ट्रा चर्बी को कम करता है|
  2. इमुनिटी मजबूत करता है| कब्ज़ की समस्या को पूरी तरह दूर करता है|(Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi)
  3. यह एड़ियों, कूल्हों और जांघों की flexibility increase(लचीला) करने में मदद करता है
  4. बालासन से पूरे शरीर की आंतरिक ओर बाहरी अंगों की अच्छे से मालिश हो जाती है ओर शरीर के अंग सक्रीय,कोमल ओर लचीले हो जाते है|
  5. बालासन शरीर के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द से राहत देता है।
  6. यह आसन महिलाओ के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इससे मासिक धर्म में होने वाले दर्द से निजात मिलती है|
  7. यदि आपको कार्य करते वक्त अत्यधिक थकान और आलस महसूस होता है तो इस आसन को करना आपके लिए बेहद ही फायदेमंद है|

हलासन

यदि आप  नियमित रूप से हलासन का अभ्यास करते हैं तो  इससे शरीर में भरपूर ऊर्जा का संचार होता है और  शरीर में रक्त संचार बढ़ता है साथ ही  पेट के आसपास लचीलापन बढ़ जाता है। हलासन शरीर से तनाव और टेंशन को दूर करता है। गले और गर्दन में होने वाले दर्द में इसके नियमित अभ्यास से कमी आने लगती है।

अगर आपको साइनोसाइटिकस की समस्या है या फिर श्वसन नली में कोई बलगम या कफ जमने की समस्या रहती है तो हलासन के अभ्यास से श्वसन तंत्र साफ हो जाता है। निरंतर अभ्यास से सांसों की गति भी स्थिर होने लगती है।

हलासन करने का तरीका-

  1. पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को जांघों के निकट टिका लें।
  2. अब आप धीरे-धीरे अपने पांवों को मोड़े, पहले 30 डिग्री पर, फिर 60 डिग्री पर और उसके बाद 90 डिग्री पर उठाएं।
  3. सांस छोड़ते हुए पैरों को पीठ उठाते हुए सिर के पीछे लेकर जाएं और पैरों की अँगुलियों को जमीन से स्पर्श करायें।
  4. अब योग मुद्रा हलासन का रूप ले चूका है।
  5. जहाँ तक संभव हो सके इस आसन को धारण करें।
  6. फिर धीरे धीरे मूल अवस्था में आएं, अब यह एक चक्र पूरा हुआ।
  7. इस तरह से आप 3 से 5 चक्र कर सकते हैं।

हमें उम्मीद है कि आपको (Immunity Booster Yoga Asanas In Hindi) में बताये गये सभी आसनों के बारे में विस्तार  समझ आ गया होगा,साथ ही आसनों के करने के सही तरीके और उनसे होने वाले फायदों के बारे भी भी समझ लिया होगा।यदि अभी भी इनसे सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव आपके मन में है तो आप हमे comment के माध्यम से साझा कर सकते हैं।

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